
Written by
Dilip Singh Gour Bureau
मानवता हुई शर्मशार ……
सैलाना/रतलाम। बारिश की बूंदों के बीच झाड़ियों से आती एक मासूम की सिसकियां… सुनने वालों के कदम ठिठक गए। सरवन मार्ग स्थित केदारेश्वर घाट की झाड़ियों में जब लोगों ने करीब 15 दिन के नवजात को लावारिस हालत में देखा, तो कुछ पल के लिए हर कोई स्तब्ध रह गया। सवाल सिर्फ इतना था—इतने छोटे मासूम को आखिर यहां कौन और क्यों छोड़ गया ?

लाल कंबल में लिपटा बच्चा बारिश के बीच झाड़ियों में पड़ा बिलख रहा था। पास में दूध की बोतल और कपड़ों की पोटली जरूर थी, लेकिन मां की गोद नहीं थी। जिस उम्र में बच्चे को मां की छाती से लगकर सुरक्षित नींद आनी चाहिए, उस उम्र में वह अनजान झाड़ियों के बीच जिंदगी के लिए रो रहा था।
मानो उसकी हर सिसकी एक ही सवाल पूछ रही थी—
“मेरा क्या कसूर था माँ…? मैंने ऐसा क्या किया था कि तुम्हारी गोद से ज्यादा इस वीरान जगह को मेरी किस्मत बना दिया?”
झाड़ियों से आई सिसकियां तो थम गए राहगीरों के कदम
भूरापानी निवासी भंवर पंडोर और उनके साथियों को झाड़ियों की ओर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। करीब जाकर देखा तो नन्हा मासूम असहाय अवस्था में पड़ा था। बारिश का मौसम था और आसपास बरसाती जीव-जंतुओं का खतरा भी था।
बच्चे को इस हालत में देखकर तत्काल जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंदू मईड़ा को सूचना दी गई। देखते ही देखते आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और मासूम को सुरक्षित करने में जुट गए।
भील चंदू मईड़ा, सुरेंद्र डिंडोर, राकेश जी राणा (पूर्व सरपंच), राकेश जी डामोर (सरपंच), सुनील निनामा, सुनील चारेल, दिलीप चारेल, भंवर पांडोर सहित अन्य लोगों ने तत्काल बच्चे की सुरक्षा संभाली।
पुलिस पहुंची तो मासूम को मिली गोद की गर्माहट
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी पिंकी आकाश पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने मासूम को अपनी गोद में उठाया और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
वहां डॉ. शैलेष डांगे ने बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में बच्चा स्वस्थ पाया गया। प्राथमिक उपचार और आवश्यक प्रक्रिया के बाद मासूम को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के सुपुर्द कर दिया गया।
कुछ देर पहले तक जो बच्चा बारिश, झाड़ियों और अनजान खतरे के बीच अकेला पड़ा था, अब उसके चारों ओर लोगों की सुरक्षा थी।
एक सवाल अब भी बाकी है…
मासूम सुरक्षित है, लेकिन उसकी कहानी का सबसे दर्दनाक अध्याय अभी बाकी है—उसे वहां छोड़कर जाने वाला कौन था?
पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। प्रयास है कि उस व्यक्ति या माता-पिता की पहचान हो सके, जिन्होंने नवजात को इस हालत में छोड़ा।
फिलहाल मासूम की सिसकियां थम चुकी हैं…
लेकिन केदारेश्वर घाट की वे झाड़ियां शायद लंबे समय तक उस सवाल की गवाह रहेंगी—
“मेरा क्या कसूर था माँ…?”
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