
Written by
Dilip Singh Gour Bureau
45 प्रतिशत ही भरा डेम, सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा; पेयजल के लिए सुरक्षित रहेगा धोलावाड़ का पानी, चोरी पर पंप-पाइप होंगे जब्त
रतलाम। जिस धोलावाड़ बांध की परिकल्पना कभी आदिवासी अंचल में सिंचाई की सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी, वही बांध आज रतलाम की पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। धोलावाड़ बांध, जिसे सरोज सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में कम बारिश के कारण करीब 45 प्रतिशत ही भरा है। ऐसे में कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने इसके पानी को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराने और उपलब्ध जल को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
धोलावाड़ बांध की कहानी में एक ओर सैलाना से सात बार विधायक रहे एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वर्गीय प्रभुदयाल गेहलोत की विकास दृष्टि जुड़ी है, तो दूसरी ओर आज इस जलस्रोत के संरक्षण की जिम्मेदारी कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया के प्रशासनिक निर्णय के रूप में सामने आई है।
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प्रभुदयाल गेहलोत की दूरदृष्टि का परिणाम
– धोलावाड़ बांध के निर्माण में स्वर्गीय प्रभुदयाल गेहलोत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके प्रयासों से इस सिंचाई परियोजना की आधारशिला रखी गई और आगे चलकर इसका निर्माण पूरा हुआ। परियोजना का उद्देश्य आदिवासी अंचल सहित रतलाम जिले के बड़े हिस्से में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना था।
– बांध के निर्माण के बाद क्षेत्र में कृषि और सिंचाई व्यवस्था को लाभ मिला। समय के साथ इसकी उपयोगिता केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रही और यह पेयजल व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण जलस्रोत बन गया।
– स्वर्गीय प्रभुदयाल गेहलोत की धर्मपत्नी श्रीमती सरोज देवी के नाम से इसे सरोज सरोवर के नाम से भी जाना जाता है। धोलावाड़ बांध को उनके प्रमुख विकास कार्यों में शामिल किया जाता है।
दशकों बाद बदली जरूरत, अब पेयजल सबसे बड़ी प्राथमिकता
समय के साथ धोलावाड़ बांध की भूमिका भी बदल गई है। आज जब जिले में बारिश कम हुई है और डेम लगभग 45 प्रतिशत ही भरा है, तब उपलब्ध जल को भविष्य के लिए बचाना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
इसी स्थिति को देखते हुए कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि धोलावाड़ डेम से सिंचाई के लिए जल नहीं दिया जाए और उपलब्ध पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जाए।
कलेक्टर ने कहा कि जिले में बारिश का दौर समाप्त हो गया है। ऐसी स्थिति में डेम से गेहूं की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों को किसानों को चना अथवा कम पानी वाली अन्य फसलें लेने के लिए समझाइश देने के निर्देश दिए गए हैं।
– धोलावाड़ के पानी पर नजर, चोरी हुई तो होगी कार्रवाई
पेयजल के लिए पानी सुरक्षित रखने के साथ ही डेम से अवैध रूप से पानी लेने वालों पर भी प्रशासन सख्ती करेगा। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि यदि कोई व्यक्ति डेम से पानी चोरी करने अथवा जबरदस्ती पाइप डालने का प्रयास करता है तो सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
डेम क्षेत्र में पंप अथवा सिंचाई के उपकरण पाए जाने पर उन्हें तत्काल जब्त कर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
एक ने बनाया, दूसरा बचा रहा—धोलावाड़ की विकास यात्रा
धोलावाड़ बांध की कहानी विकास और संरक्षण दोनों को जोड़ती है। स्वर्गीय प्रभुदयाल गेहलोत के प्रयासों से जिस परियोजना ने आदिवासी अंचल में सिंचाई की राह खोली, वही जलस्रोत आज रतलाम की पेयजल जरूरतों का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। वहीं वर्तमान में कम बारिश के बीच कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया द्वारा इसके पानी को सिंचाई में खर्च करने के बजाय पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का फैसला इस जलस्रोत के महत्व को एक बार फिर सामने ला रहा है।यानी धोलावाड़ की कहानी में एक दौर विकास की नींव रखने का है और दूसरा दौर उस विरासत को आने वाली जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने का।
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