
नई दिल्ली, दिल्ली
दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को लेकर एक बार फिर कानूनी विवाद सामने आया है। इस बार एक लग्जरी वोल्वो कार के मालिक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया है कि उनकी 10 साल पुरानी डीजल कार को प्रदूषण जांच (PUC) प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा रहा, जबकि वाहन उत्सर्जन (एमिशन) टेस्ट में सफल रहा है। वाहन मालिक का कहना है कि सॉफ्टवेयर में लगी उम्र संबंधी रोक के कारण उन्हें पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहा है, जिससे वाहन में ईंधन भरवाने में भी परेशानी हो रही है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल शिकायत में वाहन मालिक ने बताया कि उनकी वोल्वो XC-60 डीजल कार सभी आवश्यक एमिशन मानकों पर खरी उतरती है, लेकिन पीयूसी केंद्र का सॉफ्टवेयर निर्धारित आयु सीमा पूरी होने के कारण प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं देता। उनका कहना है कि इस तकनीकी बाधा के चलते वाहन का नियमित उपयोग भी प्रभावित हो रहा है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दलील दी कि वोल्वो XC-60 जैसी प्रीमियम श्रेणी की गाड़ियों का उपयोग लंबे समय तक किया जा सकता है। ऐसे वाहनों को केवल उम्र के आधार पर अनुपयोगी मानना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी गाड़ियों को समय से पहले स्क्रैप करना पड़े तो वाहन मालिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि पीयूसी केंद्रों के संचालकों ने स्पष्ट किया है कि उनके सॉफ्टवेयर सिस्टम और संचालन संबंधी निर्देश ऐसे किसी भी वाहन को पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति नहीं देते, जिसने निर्धारित आयु सीमा पूरी कर ली हो। यह प्रतिबंध तब भी लागू हो रहा है, जब वाहन प्रदूषण जांच में सफल हो चुका हो।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को दिए अपने आदेश में कहा था कि केवल वाहन की उम्र के आधार पर 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इसके बावजूद यदि पीयूसी प्रमाणपत्र जारी करने में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं बनी हुई हैं, तो यह मामला अदालत के आदेशों के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़ा करता है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और संबंधित अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अदालत इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्देश जारी करती है, तो दिल्ली-एनसीआर में हजारों ऐसे वाहन मालिकों को राहत मिल सकती है, जो उम्र सीमा पूरी होने के बावजूद फिटनेस और प्रदूषण मानकों का पालन कर रहे हैं।










