

सालों की तन्हाई पर भारी पड़ा बेटियों का स्नेह: वृद्धाश्रम में राखी बाँध बेटियों ने बिखेरी खुशियाँ
रतलाम। रक्षाबंधन का त्योहार केवल कलाई पर धागा बाँधने की परंपरा नहीं, बल्कि दिल से दिल के जुड़ने की एक पावन अनुभूति है। इसी खूबसूरत और भावुक एहसास को सच कर दिखाया मारुति एकेडमी, सातरुंडा की छात्राओं ने। जब ये मासूम बेटियाँ रतलाम के विरियाखेड़ी स्थित वृद्धाश्रम पहुँचीं, तो वहाँ का माहौल सिर्फ उत्सवमय ही नहीं हुआ, बल्कि स्नेही आत्मीयता की मिठास से भर उठा।

मुस्कुरा उठीं झुर्रियाँ, खिल उठे चेहरे
वृद्धाश्रम में अपनों के इंतजार में बैठे बुजुर्गों की कलाई पर जब बेटियों ने प्यार की राखी सजाई, तो सालों की तन्हाई जैसे पल भर में सिमट गई। बेटियों ने पूरे आदर के साथ बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, तो दादा-दादी और नाना-नानी बने बुजुर्गों की आँखें खुशी से छलक आईं। कई चेहरों पर बरसों बाद ऐसी बेफिक्र और सच्ची मुस्कान देखने को मिली, जिसने हर देखने वाले का दिल छू लिया।
सोच को मिली दिशा, संस्कारों को मिला पंख
इस प्रेरणादायक और मानवीय पहल की परिकल्पना संस्था के अध्यक्ष श्री सतपाल सिंह भाटी जी की रही। उनके इस विचार को प्रबंध निदेशक श्री कुनाल सोनी जी ने विशेष महत्व देते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ धरातल पर उतारा और इस दिन को यादगार बना दिया।
किताबों से परे, जीवन का असली पाठ
मारुति एकेडमी का मानना है कि वास्तविक शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें संस्कारों, संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्वों का समावेश होना आवश्यक है। विद्यालय द्वारा समय-समय पर ऐसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, ताकि बच्चे बुजुर्गों का आदर करना, मानवीय मूल्य और सेवा-भाव सीख सकें।
विद्यालय का यह प्रयास एक दूरगामी सोच को दर्शाता है—ज्ञान के साथ-साथ बच्चों में ऐसे संस्कार बोए जाएँ कि भविष्य में किसी भी माता-पिता या बुजुर्ग को अपने ही बच्चों से दूर वृद्धाश्रम की चौखट न लांघनी पड़े।
मासूम बेटियों की यह आत्मीय पहल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पूरे समाज के लिए प्रेम, सम्मान, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का एक अनुपम संदेश बनकर सामने आई।

कलाई पर राखी, चेहरे पर









