
Written by
Dilip Singh Gour Bureau
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कभी जंगल में आम आदमी की तरह पैदल चलते दिखे कलेक्टर, कभी चेकडैम का पानी खुद पीकर परखा
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पौधा लगाया और हाथ जोड़कर किया नमन, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का दिया संदेश
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859 हेक्टेयर में सघन वन विकास, तीन साल में 2 लाख पौधों का रोपण
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56 चेकडैम से 45 करोड़ लीटर वर्षा जल संरक्षण का प्रयास
रतलाम / सैलाना, 4 सितंबर। आमतौर पर कलेक्टर का निरीक्षण सरकारी वाहन, अधिकारियों के काफिले और औपचारिक व्यवस्थाओं के बीच नजर आता है, लेकिन सैलाना प्रवास के दौरान रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया का अंदाज कुछ अलग ही दिखाई दिया। शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में निरीक्षण के दौरान वे कभी करीब 6 किलोमीटर तक पैदल चलते, कभी चेकडैम में जमा पानी को खुद पीकर उसकी गुणवत्ता परखते और कभी पौधा लगाने के बाद हाथ जोड़कर प्रकृति को नमन करते नजर आए।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में विकसित किए जा रहे सघन वन एवं जल संरक्षण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर ने पूरे क्षेत्र का पैदल भ्रमण किया। उन्होंने पौधरोपण, पौधों के रखरखाव, जल संरक्षण तथा स्थानीय ग्रामीणों को मिलने वाले संभावित लाभों की जानकारी ली।
चेकडैम का पानी खुद पीकर चखा स्वाद
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर की नजर चेकडैम में एकत्रित स्वच्छ पानी पर पड़ी। उन्होंने पानी को देखकर उसकी स्थिति जानने के साथ खुद पानी पीकर उसका स्वाद भी चखा। पानी पीने के बाद उन्होंने सहज अंदाज में कहा— “इस पानी का स्वाद हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा है।”कलेक्टर के इस अंदाज ने मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। निरीक्षण के दौरान उनका व्यवहार पूरी तरह सहज नजर आया। उन्होंने जल संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वर्षा जल का संरक्षण पर्यावरण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
859 हेक्टेयर में विकसित हो रहा सघन वन
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में करीब 859 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन वन विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत पिछले तीन वर्षों में करीब 2 लाख पौधों का रोपण एवं रखरखाव किया गया है। बीजारोपण के माध्यम से 3 लाख से अधिक पौधों की नर्सरी भी तैयार की गई है।
नर्सरी कार्य में स्थानीय समुदाय की भागीदारी है और इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्थानीय महिलाओं की सहभागिता बताई गई है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर मिल रहे हैं। परियोजना के अगले चरण में एक लाख नए पौधे लगाने की तैयारी है। आगामी वर्षों में कुल 5 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है।
56 चेकडैम से 45 करोड़ लीटर पानी रोकने का प्रयास
वन क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए करीब 56 चेकडैम बनाए गए हैं। इनके माध्यम से लगभग 45 करोड़ लीटर वर्षा जल के संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा करीब 2 करोड़ लीटर क्षमता वाले तीन सरोवर विकसित किए गए हैं। इन जल संरचनाओं के पानी से लगभग 75 रेन गन तथा करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से सिंचाई कार्य किया जा रहा है।
14 गांवों को मिलेगा लाभ
परियोजना क्षेत्र से जुड़ी तीन ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को जल संरक्षण और पर्यावरणीय गतिविधियों का लाभ मिलने की संभावना है। यहां जल संरक्षण, वन विकास, बिगड़े वनों का सुधार, वन सुरक्षा और स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
ग्राम वन समितियों के सहयोग से प्राकृतिक संपदा का विकास, जल प्रबंधन, पौधरोपण, वन सुधार एवं सुरक्षा जैसे कार्य किए जा रहे हैं।
अतिक्रमण की स्थिति पर भी लिया संज्ञान
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने वन क्षेत्र में किए जा रहे अतिक्रमण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वन क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पौधरोपण के साथ पौधों की सुरक्षा, नियमित देखभाल और जल संरचनाओं का रखरखाव भी जरूरी है, तभी आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र बेहतर हरित एवं जल संरक्षण मॉडल के रूप में विकसित हो सकेगा।
पौधा लगाया और हाथ जोड़कर किया नमन
भ्रमण के दौरान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने वन क्षेत्र में चंपा का पौधा लगाया। पौधा लगाने के बाद उन्होंने उसके सामने हाथ जोड़कर नमन भी किया। यह दृश्य उनके प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश देता नजर आया।
उन्होंने कहा कि पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसे सुरक्षित रखकर वृक्ष के रूप में विकसित करना है।

‘कलेक्टर’ से ज्यादा ‘आम आदमी’ नजर आया अंदाज
शिवगढ़ में कलेक्टर का निरीक्षण केवल सरकारी कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा। उनका सहज अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। कभी वे जंगल में 6 किलोमीटर पैदल चलते नजर आए, कभी सरोवर का पानी खुद पीकर उसका स्वाद परखा और कभी पौधा लगाने के बाद हाथ जोड़कर नमन किया।
उनकी इन तस्वीरों में एक अधिकारी की औपचारिकता से ज्यादा एक आम इंसान का प्रकृति के प्रति जुड़ाव नजर आया। यही वजह रही कि शिवगढ़ का यह निरीक्षण सामान्य प्रशासनिक दौरे से अलग और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा हुआ दिखाई दिया।

हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के जिला समन्वयक निलेश शुक्ला ने कलेक्टर को संस्था की गतिविधियों एवं शिवगढ़ परियोजना की जानकारी दी। इस दौरान सैलाना एसडीएम कृष्णपाल सिंह बघेल, तहसीलदार मनीष जैन सहित संबंधित अधिकारी एवं संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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