
“विकास के स्वर्णिम चार वर्ष” से लेकर आज के सवाल तक—क्या सैलाना में फिर लौटेगी विकास की वही रफ्तार ?
सैलाना विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक संगीता विजय चारेल का आज जन्मदिन है। इस अवसर पर उनके राजनीतिक सफर, जनसंपर्क और विधायक कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों को याद किया जा रहा है। सैलाना की राजनीति में उनका नाम उस दौर से जुड़ा है, जब भाजपा ने कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था।
संगीता चारेल के समर्थकों के बीच उनके कार्यकाल को कभी “विकास के स्वर्णिम पांच वर्ष” और “विकास की परिकल्पना को साकार करने वाला दौर” कहा गया। उनके समर्थकों का कहना था कि सहज, सरल, हंसमुख और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण उन्होंने आम लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
पक्ष-विपक्ष से ऊपर विकास की राजनीति का दावा
उनके समर्थकों के अनुसार, संगीता चारेल ने अपने राजनीतिक कार्यकाल में पक्ष और विपक्ष के बीच भेद किए बिना विकास को प्राथमिकता देने की कोशिश की। क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में उनकी मौजूदगी और सहज उपलब्धता को उनके जनसंपर्क की बड़ी ताकत माना गया। उनके समर्थकों का दावा रहा कि उन्होंने राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत संबंधों से अलग रखा और क्षेत्र के विकास को अपनी राजनीति का मूल आधार बनाया। इसी वजह से उनके समर्थकों ने उस समय यह तक कहा था कि “ऐसे व्यक्तित्व का होना सुखद अनुभव है, जिसकी सराहना पक्ष ही नहीं, विपक्ष के लोग भी करें।”
विकास की परिकल्पना को बनाया साकार
संगीता चारेल के कार्यकाल में सड़क, जल और शिक्षा से जुड़े कई कार्य चर्चा में रहे। सैलाना-रावटी टू-लेन मार्ग और रतलाम-बाजना टू-लेन मार्ग, जल संकट के दौरान टैंकरों से जलापूर्ति, कुंदनपुर डैम और हनुमान सागर तालाब से जुड़े विकास कार्यों को उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में रावटी और बाजना में कॉलेज की स्थापना तथा विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए स्मार्ट फोन वितरण जैसी पहलें भी चर्चा में रहीं। उनके समर्थकों ने उस समय उनके कार्यकाल को यह कहते हुए रेखांकित किया था कि सीमित समय में जिस गति से विकास कार्य आगे बढ़े, वह क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय था।
छवि धूमिल करने के प्रयास भी चर्चा में रहे
राजनीति में लोकप्रियता के साथ विरोध भी स्वाभाविक है। संगीता चारेल के राजनीतिक जीवन के दौरान उनकी छवि को लेकर विरोध और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। उनके समर्थकों ने इसे “छवि धूमिल करने का असफल प्रयास” बताते हुए कहा था कि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता को इस तरह के प्रयास प्रभावित नहीं कर सके।
“क्षेत्र के सुख-दुख को अपना सुख-दुख माना”
संगीता चारेल की राजनीतिक छवि का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका जनसंपर्क रहा। उनके समर्थकों के अनुसार, क्षेत्रवासियों के सुख-दुख में वे लगातार मौजूद रहती थीं और आम लोगों के लिए उनकी सहज उपलब्धता ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। यही वजह रही कि उनके समर्थक यह मानते थे कि राजनीति में उनका सबसे मजबूत पक्ष उनका व्यवहार और जनता से सीधा जुड़ाव था।
– उनके कार्यकाल को याद करते हुए समर्थकों की ओर से कही गई पंक्तियां आज भी उनके राजनीतिक सफर की तस्वीर पेश करती हैं
“जब से चला हूं मेरी मंजिल पर नजर है,
इन आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा।”
आठ साल बाद विकास की निरंतरता पर सवाल
लेकिन आज, उनके जन्मदिन के अवसर पर पुराना दौर याद करते हुए एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—संगीता चारेल के बाद सैलाना में विकास की वही निरंतरता क्यों नहीं बनी ? स्थानीय चर्चाओं में यह बात सामने आती रही है कि पिछले करीब आठ वर्षों में क्षेत्र में विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। बड़े और दूरगामी विकास कार्यों की निरंतरता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। सवाल यह नहीं कि विकास बिल्कुल नहीं हुआ, बल्कि सवाल यह है कि क्या विकास की वह गति और विजन लगातार आगे बढ़ पाया, जिसकी उम्मीद सैलाना की जनता ने की थी ?सड़क, जल, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में सैलाना को अभी भी कई नई परियोजनाओं और निरंतर प्रयासों की जरूरत है।
जन्मदिन पर फिर चर्चा में आया “विकास का मॉडल”
संगीता चारेल का जन्मदिन इस लिहाज से भी खास है कि उनके राजनीतिक कार्यकाल की पुरानी तस्वीर और वर्तमान सैलाना की विकास संबंधी अपेक्षाएं एक साथ चर्चा में आ रही हैं। एक तरफ समर्थक उनके कार्यकाल को “विकास के स्वर्णिम पांच वर्ष” बताते हैं, तो दूसरी तरफ आज का सवाल यह है कि उस विकास की निरंतरता आगे क्यों नहीं बनी रह सकी। सैलाना की जनता के लिए असली मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष की राजनीति नहीं, बल्कि विकास की लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।




जन्मदिन विशेष: सैलाना के विकास









