
व्यापारियों की मांग साफ है — सड़क चौड़ी करो, लेकिन हमें सड़क पर मत लाओ।
पहले नई दुकान बनाकर दो, फिर पुरानी हटाओ; बोले—विकास भी हो और हमारी रोजी-रोटी भी बचे

सैलाना। बस स्टैंड चौड़ीकरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच व्यापारियों ने नगर परिषद के सामने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि वे विकास कार्य के खिलाफ नहीं हैं और न ही सड़क चौड़ीकरण में किसी तरह की बाधा पहुंचाना चाहते हैं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि पहले उनकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और उसके बाद वर्तमान दुकानों को हटाया जाए।
व्यापारियों का कहना है कि नगर परिषद जिस स्थान पर नई दुकानें बनाकर देने की योजना बना रही है, पहले वहां दुकानें तैयार कर उन्हें आवंटित किया जाए। इसके बाद वर्तमान दुकानों को हटाकर चौड़ीकरण का काम शुरू किया जाए। इससे नगर परिषद का काम भी समय पर शुरू हो सकेगा और व्यापारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित नहीं होगी।

पहले नई दुकान, फिर पुरानी हटाओ
व्यापारियों का सवाल है कि जब नई दुकानें बनाकर देने की योजना है तो पुरानी दुकानों को हटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों?
व्यापारियों का कहना है कि पहले उन्हें वर्षों पुरानी दुकानों से हटा दिया जाए, फिर वे दर-दर भटकें और उसके बाद नई दुकान मिलने का इंतजार करें—क्या विकास की यही सही प्रक्रिया है?
व्यापारियों ने सवालिया अंदाज में कहा कि “पहले दुकान छीनो, फिर दुकान देने की बात करो। जब नई दुकान बनाकर देना ही है तो पहले बनाकर दे दो, फिर पुरानी दुकानें हटा दो।”
विकास भी हो, व्यापार भी चले
व्यापारियों का कहना है कि उन्हें बस स्टैंड चौड़ीकरण से कोई आपत्ति नहीं है। सड़क चौड़ी हो, यातायात व्यवस्था बेहतर हो और शहर का विकास हो—इसमें वे सहयोग करने को तैयार हैं। लेकिन विकास की कीमत उनकी रोजी-रोटी और वर्षों पुराने कारोबार के रूप में नहीं होनी चाहिए।
उनका कहना है कि यदि पहले वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध करा दी जाती हैं तो विवाद की स्थिति भी नहीं बनेगी और चौड़ीकरण का काम भी बिना किसी टकराव के तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
अब सवाल नगर परिषद के सामने है—
पहले दुकान या पहले बुलडोजर?
व्यापारियों का कहना है कि “पहले नई दुकान, फिर पुरानी दुकान हटाओ” का रास्ता अपनाया जाए। इससे विकास भी होगा, चौड़ीकरण भी होगा और व्यापारियों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रहेगी।

व्यापारियों ने कहा—हम विकास के









