
Written by
Dilip Singh Gour Bureau
नाल-बावड़ी की ग्राम सभा में 400 से 500 ग्रामीण जुटे, निर्णय निरस्त करने का प्रस्ताव वन अधिकारी को सौंपा

रतलाम । ग्राम पंचायत बावड़ी, तहसील सैलाना, जिला रतलाम के अंतर्गत ग्राम नाल एवं बावड़ी में वन भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण विषय को लेकर वन अधिकारी की उपस्थिति में ग्राम सभा आयोजित की गई। ग्राम सभा में दोनों गांवों से करीब 400 से 500 ग्रामीणजन उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमि एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) को सौंपे जाने की जानकारी सामने आने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में ग्राम समुदाय की सहमति एवं अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए उक्त भूमि एनजीओ को सौंपे जाने के निर्णय को निरस्त कराने के लिए आवेदन एवं ग्राम सभा का प्रस्ताव वन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया।
“ग्राम सभा की सहमति के बिना निर्णय स्वीकार नहीं”
मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशूराम निनामा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों से जुड़ा विषय है। ग्रामीणों के हितों और अधिकारों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई है और गांव से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में ग्राम सभा की आवाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
निनामा ने कहा कि ग्रामीण शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें, लेकिन अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित रहें। उन्होंने कहा कि “हम ग्रामीणों की आवाज को ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक पहुंचाएंगे और जरूरत पड़ी तो सदन में भी मजबूती से बात रखेंगे।”

ग्रामीणों ने एकजुट होकर रखी बात
ग्राम सभा में ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से उनका प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ाव रहा है। ऐसे में वन भूमि से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय ग्राम समुदाय की बात सुनी जानी चाहिए। ग्रामीणों ने वन भूमि से जुड़े निर्णयों में ग्राम सभा की भूमिका सुनिश्चित करने की मांग रखी।
इस अवसर पर बाप ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र पारगी, सरपंच प्रतिनिधि दिलीप पारगी, सोहनलाल अमलियार (मंत्री), लालसिंह भूरिया (पटेल नाल), कैलाश डामर, मुकेश डामर, राजू मयड़ा एवं पप्पू भाभर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्राम सभा के दौरान ग्रामीणों ने अपने अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जागरूक एवं संगठित रहने का संकल्प लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान “जल, जंगल और जमीन हमारा अधिकार है” का संदेश प्रमुखता से सामने आया।
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