
Written by
Dilip Singh Gour Bureau

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष एवं MLC लाल बिहारी यादव का एक विवादित बयान सामने आया है। आजमगढ़ के नेहरू हॉल में आयोजित सपा की शिक्षक गोष्ठी के दौरान दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में लाल बिहारी यादव पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से प्रत्याशी के बजाय पार्टी और नेतृत्व के नाम पर मतदान करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “अगर अखिलेश यादव कुत्ते के गले में घंटी बांधकर भी भेज दें, तब भी उसी को वोट देना है।” उन्होंने इसके पीछे व्यक्ति से ज्यादा पार्टी और संगठन को महत्व देने की बात कही।
बताया जा रहा है कि यह कार्यक्रम 30 अगस्त 2026 को आजमगढ़ के नेहरू हॉल में गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी कमलेश यादव के समर्थन में आयोजित शैक्षिक विचार गोष्ठी से जुड़ा था। कार्यक्रम में सपा के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
“व्यक्ति को छोड़िए, पार्टी और संगठन महत्वपूर्ण”
अपने संबोधन में लाल बिहारी यादव ने पार्टी प्रत्याशी की व्यक्तिगत योग्यता के बजाय संगठन के निर्णय के साथ खड़े होने पर जोर दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि व्यक्ति की बात छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि पार्टी और संगठन अधिक महत्वपूर्ण हैं।
इसके बाद उन्होंने आगामी चुनाव को लेकर भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को “जीवन और मरण का चुनाव” बताते हुए उससे पहले होने वाले 2026 के एमएलसी चुनाव को जीतना जरूरी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि एमएलसी चुनाव बैलेट पेपर से होगा, इसलिए इसे जीतना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है।
वीडियो वायरल होने के बाद सियासत गरमाई
लाल बिहारी यादव के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं की ओर से बयान को लेकर सवाल उठाए गए हैं और इसे मतदाताओं की स्वतंत्र पसंद तथा लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़कर निशाना साधा जा रहा है। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा की ओर से भी इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आई और बाद में सपा की ओर से इसे निजी बयान बताया गया।
फिलहाल, “कुत्ते के गले में घंटी” वाला बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में इसने एक नया विवाद जरूर खड़ा कर दिया है।
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