
Written by
Dilip Singh Gour Bureau
पोषण पुनर्वास केंद्र सैलाना (NRC) के निरीक्षण के दौरान एक ऐसा संवेदनशील और भावुक कर देने वाला पल सामने आया, जिसने प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश कर दी। निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया की नजर जैसे ही 8 माह की कुपोषित बच्ची ‘जया’ पर पड़ी, वे खुद को रोक नहीं पाए और उसे गोद में उठाकर दुलारने लगे।

रतलाम :- कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया के सैलाना प्रवास के दौरान उस समय माहौल भावुक हो गया, जब पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के निरीक्षण के दौरान उनकी नजर आठ माह की नन्ही जया पर पड़ी। बच्ची को देखते ही कलेक्टर ने उसे अपनी गोद में उठा लिया और काफी देर तक स्नेहपूर्वक दुलार करते रहे।
गोद में जया को लेकर कभी दुलार, कभी प्यार से उठाया 15–20 मिनट तक हाथों में संभाला, सीने से लगाया निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक औपचारिकताएं एक तरफ रह गईं और कलेक्टर एक पिता तुल्य स्नेह के साथ करीब 15 से 20 मिनट तक नन्ही जया को गोद में लिए रहे। कभी बच्ची को सीने से लगाया तो कभी हवा में उठाकर प्यार जताया। कलेक्टर की आत्मीयता से नन्ही जया भी उनकी गोद में पूरी तरह सहज और खिलखिलाती नजर आई।

जब परिजन को सौंपा तो छलक पड़े आंसू
कुछ देर दुलारने के बाद जब कलेक्टर ने जया को उसकी मां के सुपुर्द किया, तो बच्ची उनसे अलग होकर रोने लगी। यह देख कलेक्टर ने उसे तुरंत दोबारा गोद में लिया और दुलारकर शांत कराया। इस आत्मीय दृश्य ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल छू लिया।
कागजों से परे, ज़मीनी हकीकत पर नजर
केवल दुलार ही नहीं, कलेक्टर ने जिम्मेदार अधिकारी के रूप में बच्ची जया का वजन, पोषण स्तर और अब तक चले उपचार का पूरा मेडिकल चार्ट गहराई से देखा। साथ ही केंद्र में भर्ती अन्य मासूमों के स्वास्थ्य का भी जायजा लिया।
चिकित्सकीय टीम और अधिकारियों को दिए कड़े व संवेदनशील निर्देश:
सख्त निगरानी: केंद्र में भर्ती हर बच्चे के पोषण और स्वास्थ्य सुधार की पल-पल निगरानी हो।
मानक आहार: बच्चों को निर्धारित मापदंडों के अनुसार पौष्टिक आहार और समय पर दवाएं मुहैया कराई जाएं।
संवेदनशील दृष्टिकोण: कुपोषण से लड़ाई सिर्फ कागजी आंकड़ों और रिपोर्टों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य की जिम्मेदारी मानकर काम किया जाए।
कलेक्टर श्री कटेसरिया की यह तस्वीरें और आत्मीय कार्यशैली स्पष्ट संदेश देती हैं कि जब प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवीय संवेदनाएं जुड़ती हैं, तो कुपोषण जैसी सामाजिक चुनौतियों के खिलाफ लड़ाई और भी मजबूत हो जाती है।

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