
नई दिल्ली, दिल्ली
भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ पर पाकिस्तान द्वारा मनाए गए तथाकथित ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ (शोषण दिवस) को सिरे से खारिज करते हुए इसे “सुनियोजित राजनीतिक तमाशा” और “राजनीतिक बेतुकापन” करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान एक बार फिर भारत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार और भ्रामक दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहा है, जिसका कोई आधार नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं, हमेशा से थे और हमेशा रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन केंद्र शासित प्रदेशों की संवैधानिक स्थिति को लेकर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं है।
प्रवक्ता ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए से संबंधित किए गए संवैधानिक परिवर्तन पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला थे। इन निर्णयों का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में समान अधिकार, बेहतर प्रशासन, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि इन बदलावों के बाद क्षेत्र में अभूतपूर्व सामाजिक-आर्थिक विकास, सुशासन और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण देखने को मिला है।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करने का प्रयास करता रहा है, लेकिन ऐसे प्रयासों को वैश्विक स्तर पर कोई समर्थन नहीं मिला है। मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय अपने देश की आंतरिक चुनौतियों और शासन व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
बयान में कहा गया कि पाकिस्तान द्वारा हर वर्ष ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ मनाना केवल एक राजनीतिक अभियान है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना और भारत के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाना है। भारत ने ऐसे सभी प्रयासों को निराधार बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया लगातार मजबूत हो रही है। हाल के वर्षों में स्थानीय निकायों और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार का कहना है कि इन विकास कार्यों का लाभ क्षेत्र के आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भी अपना रुख दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दे पूरी तरह भारत के आंतरिक और संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए किसी भी बाहरी देश की टिप्पणी या हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान हर वर्ष 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसाल’ के रूप में मनाता है। यह दिन भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को हटाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के फैसले की वर्षगांठ के रूप में देखा जाता है। वहीं भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह निर्णय पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया था और इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समान विकास के अवसर उपलब्ध कराना है।
विदेश मंत्रालय के ताजा बयान के साथ भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर उसका रुख अटल है तथा पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार या राजनीतिक अभियान का तथ्यों और संवैधानिक स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।










