
Bhopal, Madhya Pradesh
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित सौरभ शर्मा मामले में लोकायुक्त संगठन ने जांच लगभग पूरी कर ली है। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा पर भ्रष्टाचार के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जुटाने का आरोप है। अब इस मामले में सितंबर में अदालत में आरोप पत्र पेश किए जाने की संभावना है।
फिलहाल लोकायुक्त को अभियोजन स्वीकृति का इंतजार है। इसके बाद चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसी सौरभ शर्मा के अलावा 15 से अधिक अन्य लोगों को भी मामले में आरोपित बनाने की तैयारी कर रही है।
इनमें सौरभ की पत्नी, मां, दोस्त शरद जायसवाल, कारोबारी सहयोगी चेतन गौर और अन्य रिश्तेदार शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में ऐसे लोगों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर कथित तौर पर सौरभ की अवैध कमाई को छिपाने या ठिकाने लगाने में मदद करने का आरोप है।
दिसंबर 2024 में पड़ा था छापा
लोकायुक्त पुलिस ने 19 दिसंबर 2024 को सौरभ शर्मा के घर और कार्यालय पर छापा मारा था। इस कार्रवाई के अगले दिन मामले में बड़ा खुलासा हुआ।
आयकर विभाग की टीम को भोपाल के मेंडोरी गांव में एक लावारिस कार मिली थी। तलाशी के दौरान कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ 60 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया कि कार सौरभ शर्मा के कारोबारी सहयोगी चेतन गौर के नाम पर पंजीकृत थी।
इतनी बड़ी मात्रा में सोना और नकदी बरामद होने के बाद सौरभ शर्मा का मामला चर्चा में आ गया था। जांच एजेंसियों ने इसके बाद संपत्ति और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल तेज कर दी।
100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का दावा
लोकायुक्त की जांच में सौरभ शर्मा और उससे जुड़े लोगों के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति होने का पता चलने की बात सामने आई है। अब जांच के आधार पर आरोप पत्र तैयार किया जा रहा है।
हाई कोर्ट से मिली जमानत
सौरभ शर्मा को मंगलवार को जबलपुर हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। इसके बाद लोकायुक्त संगठन जल्द से जल्द आरोप पत्र अदालत में पेश करने की तैयारी में है।
यदि अभियोजन स्वीकृति समय पर मिल जाती है तो सितंबर में चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है। इसके बाद अदालत में मामले से जुड़े आरोपों और अन्य आरोपितों की भूमिका पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।










