

सैलाना बस स्टैंड चौड़ीकरण : दिन में विकास की बातें, रात में नोटिस का खेल….

दुकानदार बोले “तीसरी आंख” ने देख लिया रात का राज… नगर परिषद की कार्रवाई पर उठे सवाल
सैलाना। बस स्टैंड चौड़ीकरण का मामला अब ऐसा लगता है जैसे कोई सीरियल बन गया हो—हर दिन नया एपिसोड, नया ट्विस्ट और नए सवाल! कभी दुकानों की जर्जर हालत का निरीक्षण, कभी प्रशासन की निगरानी में रिपोर्ट तैयार करने की कवायद, कभी व्यापारी अपनी दुकान बचाने कोर्ट की शरण में… और अब रात के अंधेरे में नोटिस चस्पा करने की चर्चा ने मामले में नया तड़का लगा दिया है।
दिन में सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन व्यापारियों का आरोप है कि रात होते ही नगर परिषद का “ऑपरेशन नोटिस” शुरू हो जाता है। दुकानों पर नोटिस लगाए जाते हैं, फोटो खींचे जाते हैं और फिर कुछ समय बाद वही नोटिस गायब भी हो जाते हैं।
अब सवाल उठना तो लाजमी है —
- नोटिस लगाया गया था या सिर्फ उसकी फोटो खिंचवानी थी ?
- अगर नोटिस दुकानदार को देना था तो रात का इंतजार क्यों ?
- और अगर नोटिस हटाना ही था तो लगाया क्यों ?
तीसरी आंख ने पूरी फिल्म रिकॉर्ड कर ली!
कहते हैं—“जागो राखे साइयां, मार सके न कोय।”। बाल न बांका हो उसका जो जग बेरी होए
व्यापारियों ने दुकानों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं “तीसरी आंख” ने रात की गतिविधियों को कैमरे में कैद कर लिया।

अब नगर परिषद चाहे जितना इसे सामान्य कार्रवाई बताए, लेकिन कैमरे में कैद गतिविधियों को लेकर व्यापारियों के बीच चर्चा तेज है।
व्यापारी कह रहे हैं—
“हम सो रहे थे, लेकिन हमारी दुकान की तीसरी आंख जाग रही थी!”
दुकान टूटेगी या नई दुकान मिलेगी? असली सवाल यही!
नगर परिषद की ओर से यह बात सामने आ रही है कि बस स्टैंड चौड़ीकरण के लिए वर्तमान दुकानों को हटाकर नई दुकानें बनाई जाएंगी और व्यापारियों को स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार नई दुकानें दी जाएंगी। नई दुकानें वर्तमान स्थान से कुछ दूरी पर बनाए जाने की बात भी कही जा रही है।
लेकिन व्यापारी पूछ रहे हैं—
“पहले नई दुकान दिखाओ, फिर पुरानी दुकान हटाओ!”
व्यापारियों का तर्क है कि दुकान केवल चार दीवारें नहीं होती। उसी दुकान से परिवार चलता है, बच्चों की पढ़ाई होती है और वर्षों से व्यापार खड़ा किया गया है। ऐसे में भविष्य की व्यवस्था स्पष्ट किए बिना वर्तमान दुकान पर कार्रवाई को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
कोर्ट पहुंच चुके व्यापारी, अब प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक
दुकानदार अपनी दुकानों को बचाने के लिए न्यायालय की शरण ले चुके हैं। वहीं अब व्यापारी एकजुट होकर पुलिस प्रशासन को ज्ञापन देने की तैयारी में हैं। कलेक्टर को भी पूरे मामले से अवगत कराने की चर्चा है।
यानी मामला अब नगर परिषद बनाम दुकानदार से आगे बढ़कर व्यापारी बनाम कार्रवाई की शैली का रूप लेता जा रहा है।
अब असली परीक्षा प्रशासन की!
बस स्टैंड चौड़ीकरण जरूरी है, शहर का विकास भी जरूरी है और यातायात व्यवस्था बेहतर होना भी जरूरी है। लेकिन विकास की सड़क पर चलते हुए व्यापारियों के हित और कानूनी प्रक्रिया का ट्रैफिक सिग्नल भी हरा रहना चाहिए।
अब सवाल यह नहीं कि बस स्टैंड चौड़ा होगा या नहीं…
सवाल यह है कि चौड़ी सड़क के लिए क्या पारदर्शी रास्ता अपनाया जाएगा?
क्योंकि सैलाना में फिलहाल कहानी कुछ ऐसी चल रही है—
दिन में सर्वे…
शाम को चर्चा…
रात में नोटिस…
सीसीटीवी में रिकॉर्डिंग…
सुबह व्यापारियों में हलचल…
और फिर प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक!
बस स्टैंड चौड़ीकरण की इस कहानी का अगला एपिसोड क्या होगा, यह तो आने वाला समय बताएगा…
लेकिन फिलहाल दुकानदारों की “तीसरी आंख” पूरी तरह खुली हुई है!










