
Written by
Dilip Singh Gour Bureau
Baliochistan Thanks India: पाकिस्तान से अलग बलूचिस्तान ने खुद को नया देश घोषित कर दिया है और 11 अगस्त को यहां आजादी का जश्न जमकर मनाया गया. इंटरनेट ब्लैक आउट के बाद भी लोग इकट्ठे हुए, आतिशबाजियां जलाईं और बलोच ध्वज फहराए. इस मौके पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जो बयान जारी किया गया, उसके बाद बलोचों ने दिल से उसका शुक्रिया अदा किया है.
Balochistan Independence from Pakistan: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में 11 अगस्त को बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाया गया. इस मौके पर बलूच नेता मीर यार बलूच ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की अपील की. लंबे वक्त से आजादी मांग रहे बलूच नेताओं ने कहा कि अब आंदोलन का अगला लक्ष्य राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर दुनिया से समर्थन हासिल करना है. इस मौके पर भारत को उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर खासतौर पर शुक्रिया कहा है, लेकिन क्यों?
भारत को क्यों कहा शुक्रिया ?
इस पूरे मामले में भारत की भूमिका और उसके बयान को लेकर भी काफी चर्चा हुई. मीर यार बलूच ने भारतीय मीडिया की ओर से बलूचिस्तान के मुद्दे को उठाए जाने की सराहना की. उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय के उस रुख का भी स्वागत किया, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की बात कही गई थी. हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने बलूचिस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की घोषणा नहीं की है.
मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र, आसियान, अफ्रीकी संघ, इस्लामिक सहयोग संगठन और यूरोपीय देशों से बलूचिस्तान की कथित स्वतंत्रता को समर्थन देने की मांग की. उनका कहना है कि दुनिया को बलूचिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत कहने के बजाय एक स्वतंत्र देश के रूप में देखना चाहिए. बलूचिस्तान के लोग लंबे समय से आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं और वे पड़ोसी देश भारत से खासतौर पर इसे लेकर समर्थन की मांग करते हैं. हालांकि भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं दी लेकिन उनके संघर्ष का सम्मान किया है.
11 अगस्त की विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और बलूचिस्तान से जुड़े सवाल पूछे गए थे. इसलिए मीर यार बलूच की ओर से भारत के रुख को अपने आंदोलन के समर्थन के तौर पर पेश किया जाना और भारत की आधिकारिक मान्यता-दो अलग बातें हैं.
बलूच नेताओं का क्या दावा ?
बलूच अलगाववादी नेताओं का दावा है कि उनके क्षेत्र के लोगों को लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों और मानवाधिकारों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने अलग-अलग देशों में मौजूद बलूचों को आजादी का जश्न मनाते हुए तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं. मीर यार बलूच का कहना है कि स्वतंत्र बलूचिस्तान बनने की स्थिति में वहां अपनी सरकार, मुद्रा, पासपोर्ट, विदेश नीति, रक्षा व्यवस्था और कूटनीतिक मिशन स्थापित किए जाएंगे. इसका संविधान वे पहले ही लिख चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 11 अगस्त की तारीख को बलूच आंदोलन ऐतिहासिक स्वतंत्रता के दावे से जोड़ता है. हालांकि पाकिस्तान इन दावों को स्वीकार नहीं करता और बलूचिस्तान को देश का अभिन्न हिस्सा मानता है. पाकिस्तान सरकार बलूच सशस्त्र संगठनों को सुरक्षा के लिए खतरा बताती है.
वाकई बलूचिस्तान आजाद हो गया?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि आजादी का ऐलान और किसी क्षेत्र का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र देश बन जाना अलग-अलग चीजें हैं. बलूच नेताओं ने स्वतंत्रता और रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान की बात जरूर कही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे स्वतंत्र और संप्रभु देश के तौर पर मान्यता नहीं मिली है. इसलिए फिलहाल इसे एक राजनीतिक और अलगाववादी दावा ही माना जा रहा है. बलूचिस्तान का मुद्दा ऐसे समय में फिर चर्चा में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही सुरक्षा, राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. आने वाले समय में इस आंदोलन को कितना अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता है, इस पर सबकी नजर रहेगी.
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