
Written by
Dilip Singh Gour Bureau

– केदारेश्वर लोक बने तो बदल सकती है सैलाना की तस्वीर
– पर्यटन के नक्शे पर पहचान मिले तो खुलेंगे रोजगार के द्वार
सैलाना। भक्त और भगवान के बीच आस्था और विश्वास की एक ऐसी डोर होती है, जो दूर-दूर से श्रद्धालुओं को भगवान के दरबार तक खींच लाती है। जब आस्था का सैलाब उमड़ता है तो भक्ति का चरम रूप देखने को मिलता है। सावन के पावन माह में सैलाना की धरती पर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है, जहां भगवान भोलेनाथ के दरबार में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर जलाभिषेक और दर्शन करते हैं।
रतलाम से करीब 25 किलोमीटर दूर सैलाना नगर के आसपास स्थित केदारेश्वर महादेव के दोनों धाम धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के भी अद्भुत केंद्र हैं। ऊंची-ऊंची पहाड़ियों, चट्टानों, हरियाली और बरसाती झरनों के बीच स्थित ये स्थान बरसात के दिनों में अपनी खूबसूरती के चरम पर पहुंच जाते हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होता है, मानो वे किसी पहाड़ी तीर्थस्थल पर पहुंच गए हों। कई श्रद्धालु तो यहां आने के बाद केदारनाथ जैसी अनुभूति होने की बात भी कहते हैं।
– 278 साल पुराना है महाकेदारेश्वर मंदिर
सैलाना क्षेत्र का महाकेदारेश्वर मंदिर करीब 278 वर्ष पुराना माना जाता है। यहां भगवान शिव का प्राकृतिक शिवलिंग विराजित है। इतिहास के अनुसार पहले यहां केवल शिवलिंग हुआ करता था। वर्ष 1736 में सैलाना के महाराजा जयसिंह ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया, जिसके बाद यह स्थान केदारेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
बाद में राजा दुलेसिंह के कार्यकाल में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया और मंदिर के समीप स्थित कुंड को पक्का करवाया गया। राजा जसवंतसिंह ने मंदिर के पुजारी की आजीविका के लिए जमीन दान में दी। वर्ष 1991-92 में भी मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया।
मंदिर के पुजारी पंडित के अनुसार मंदिर सैलाना के महाराजाओं के समय से ही आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। उनकी चौथी पीढ़ी भगवान भोलेनाथ की सेवा में लगी है। भारी बारिश के बावजूद आज तक मंदिर की पूजा बाधित नहीं हुई। सावन माह में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
सैलाना में दो केदारेश्वर, दोनों की अपनी खास पहचान
सैलाना नगर के समीप स्थित केदारेश्वर महादेव के दोनों स्थान धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से खास हैं। नगर की एक ओर सावन रोड पर स्थित केदारेश्वर मंदिर को कल्याण केदारेश्वर के नाम से जाना जाता है। यहां प्रकृति की अनुपम छटाएं देखने को मिलती हैं। बरसात में पहाड़ियों से गिरते झरने, हरियाली और चट्टानों से रिसता पानी इस स्थान की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है।
वहीं शिवगढ़ रोड पर स्थित बड़ा केदारेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां भी पहाड़ी वातावरण, हरियाली और जलधाराओं के बीच भगवान भोलेनाथ के दर्शन होते हैं। सावन में कावड़ यात्री और श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं और भगवान का जलाभिषेक करते हैं।
बरसात में झरने बन जाते हैं आकर्षण का केंद्र
केदारेश्वर क्षेत्र की चट्टानों से रिसता पानी एकत्र होकर झरनों का रूप ले लेता है। ऊंचाई से गिरता पानी जब मंदिर के समीप स्थित कुंड में पहुंचता है तो पानी की छोटी-छोटी बूंदें आसपास के वातावरण को इंद्रधनुषी आभा प्रदान करती हैं। यही प्राकृतिक नजारा श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है।
यहां प्रतिवर्ष शिवरात्रि, वैशाख पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर धार्मिक आयोजन और मेले लगते हैं। वहीं श्रावण मास में कावड़ यात्राओं के चलते क्षेत्र में विशेष धार्मिक माहौल बना रहता है।
– केदारेश्वर लोक बनाने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दोनों केदारेश्वर धामों को विकसित कर ‘केदारेश्वर लोक’ का स्वरूप दिया जाए तो यह क्षेत्र पूरे वर्ष धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है। दूर-दूर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आवागमन बढ़ने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यदि यहां बेहतर सड़क, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा और पर्यटकों के लिए अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं तो सैलाना के केदारेश्वर धाम को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में पहचान मिल सकती है।
पर्यटन के नक्शे पर पहचान मिले तो खुलेंगे रोजगार के रास्ते
केदारेश्वर क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक पर्यटन की भी बड़ी संभावनाएं हैं। यदि शासन इन स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर उचित स्थान दिलाने की पहल करता है तो होटल, भोजनालय, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, प्रसाद, छोटी दुकानें और अन्य सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण अंचल के लोगों को रोजगार मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए बड़े-बड़े उद्योगों की आवश्यकता नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पहल और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ही पर्यटन की तस्वीर बदली जा सकती है।

– क्या कहते हैं लोग

– मंडी व्यापारी एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रेश चंडालिया कहते हैं कि छोटे से प्रयास से यहां विकास से बड़े रास्ते खुल सकते हैं, सिर्फ पहल करने की जरूरत है। पर्यटक यहां अपने अच्छे पल बिताने के लिए आने को तैयार हैं। यदि सुविधाओं का विकास किया जाए और इसे पर्यटन के नक्शे पर उचित पहचान मिले तो इसका लाभ सैलाना के साथ आसपास के ग्रामीण अंचल को भी मिलेगा।

– पत्रकार संतोष धबाई कहते हैं कि सैलाना नगर में विराजित भगवान महादेव का यह चमत्कार ही है कि दूर-दूर से लोग यहां खिंचे चले आते हैं। इन स्थानों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए तथा शासन को इनकी प्रसिद्धि के लिए प्रयास करने चाहिए। यदि शासन-प्रशासन वास्तव में अंचल के लोगों के हित और विकास को लेकर गंभीर है तो केदारेश्वर के विकास की दिशा में पहल करना जरूरी है।
– अब इंतजार उस पहल का, जो बदल दे तस्वीर
सैलाना के केदारेश्वर धाम आज भी शासन-प्रशासन की उस पारखी नजर का इंतजार कर रहे हैं, जो धार्मिक आस्था के साथ यहां छिपी पर्यटन की अपार संभावनाओं को पहचान सके। सवाल यही है कि क्या इन प्राकृतिक और धार्मिक धरोहरों को ‘केदारेश्वर लोक’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कोई ठोस पहल होगी ? यदि ऐसा हुआ तो संभव है कि आज श्रद्धालुओं की आस्था से पहचाने जाने वाला केदारेश्वर कल सैलाना के विकास और ग्रामीण अंचल के रोजगार का नया केंद्र बन जाए।
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