
महामृत्युंजय तप की पूर्णाहुति पर बिहार सेवक तपस्वी रत्न मुकेश चंडालिया का हुआ भावपूर्ण बहुमान
सैलाना। तपस्या केवल शरीर को साधने का मार्ग नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान और जीवन को धर्ममय बनाने की साधना है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए बिहार सेवक तपस्वी रत्न भाई मुकेश चंडालिया ने महामृत्युंजय तप की पूर्णाहुति की। इस अवसर पर साध्वी वर्या श्री चारुदर्शा श्रीजी म.सा., श्री विधिता श्रीजी म.सा. एवं श्री प्रभूता श्रीजी की निश्रा में उनका भावपूर्ण बहुमान किया गया।
तपस्वी के बहुमान से पूर्व आयोजित धर्मसभा में पूज्य साध्वी श्री ने तप की महिमा बताते हुए कहा कि तप केवल शरीर की शुद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान का भी महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने कहा कि मुकेश भाई जिन शासन के सच्चे सेवक हैं। उनकी चौथी मासक्षमण तपस्या पूर्ण हुई है। तपस्या के साथ-साथ वे साधु-संतों की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं। यही सेवा-भाव उन्हें विशिष्ट बनाता है और पूरे भारत में वे ‘बिहार सेवक’ के रूप में पहचाने जाते हैं।
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गीतों से हुई तपस्या की अनुमोदना
मुकेश चंडालिया की तपस्या की अनुमोदना करते हुए स्मिता चंडालिया एवं लब्धी चंडालिया ने भावपूर्ण गीतों की प्रस्तुति दी। गीतों के माध्यम से तप, त्याग और साधना की भावना को अभिव्यक्त किया गया, जिससे धर्मसभा का वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इसके पश्चात चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रियंक चंडालिया एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने तपस्वी मुकेश भाई का बहुमान किया। समिति के कोषाध्यक्ष शुभम मेहता ने सम्मान पत्र का वाचन किया।
बहुमान की श्रृंखला में जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक युवक महासंघ, सैलाना इकाई के अध्यक्ष तरुण बाफना एवं पदाधिकारियों ने साल, माला एवं श्रीफल भेंट कर तपस्वी का सम्मान किया।कार्यक्रम का संचालन वैभव जैन ने किया।
सैलाना श्रीसंघ में तपस्या का बना आध्यात्मिक माहौल
उल्लेखनीय है कि सैलाना श्रीसंघ में चातुर्मास के दौरान विभिन्न तपस्याओं की आराधना निरंतर चल रही है। 40 दिवसीय मुनिसुव्रत तप में 48 आराधक तपस्या कर रहे हैं। इसके साथ ही तेले एवं आयंबिल की श्रृंखला भी निरंतर जारी है।










