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ट्रंप की गाजा शांति योजना पर नेतन्याहू की दो टूक, बोले- हथियार डाले बिना पीछे नहीं हटेगी इजरायली सेना

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Written by
Dilip Singh Gour Bureau

यरुशलम, इजरायल

गाजा में जारी युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित शांति योजना को लेकर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है। नेतन्याहू ने साफ कहा कि जब तक हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सशस्त्र संगठन पूरी तरह अपने हथियार नहीं डालते और पूरे क्षेत्र को हथियारविहीन नहीं बनाया जाता, तब तक इजरायली सेना अपनी सैन्य तैनाती से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दोहराया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर इजरायल किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

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नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से गाजा में संघर्ष विराम, बंधकों की रिहाई और पुनर्निर्माण को लेकर नई शांति पहल पर चर्चा चल रही है। हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री का कहना है कि किसी भी राजनीतिक या मानवीय समझौते से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में हमास दोबारा इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा न बन सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गाजा में पुनर्निर्माण और सामान्य जीवन की बहाली तभी संभव है, जब वहां सक्रिय आतंकी संगठनों की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाए। उनके अनुसार, यदि बिना सुरक्षा सुनिश्चित किए इजरायली सेना पीछे हटती है तो इससे भविष्य में फिर बड़े हमलों का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए इजरायल की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा करना है।

नेतन्याहू ने हाल ही में मिस्र की राजधानी काहिरा में हमास और अमेरिकी प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि यदि किसी प्रकार का समझौता या प्रस्ताव तैयार किया गया है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना था कि दुनिया को यह जानने का अधिकार है कि बातचीत में किस पक्ष ने कौन-कौन सी शर्तें स्वीकार की हैं और उन पर अमल की समयसीमा क्या होगी।

इजरायल सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन किया है। कैबिनेट मंत्री एली कोहेन ने कहा कि गाजा में सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक हमास की सैन्य और संगठनात्मक क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी संघर्ष विराम से स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती और इसके लिए आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह खत्म करना आवश्यक है।

दूसरी ओर, हमास का रुख इजरायल से बिल्कुल अलग है। संगठन का कहना है कि वह तभी हथियार डालने या किसी स्थायी समझौते पर विचार करेगा, जब इजरायली सेना पूरी तरह गाजा से हटे और सभी सैन्य अभियान बंद किए जाएं। हमास का यह भी कहना है कि गाजा में लंबे समय से जारी सैन्य कार्रवाई और मानवीय संकट को समाप्त करना किसी भी बातचीत की पहली शर्त होनी चाहिए।

इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। जहां इजरायल पहले हथियार डालने और सुरक्षा की गारंटी चाहता है, वहीं हमास पहले इजरायली सेना की वापसी और सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग कर रहा है। यही कारण है कि अब तक किसी स्थायी युद्धविराम पर सहमति नहीं बन सकी है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, मिस्र, कतर और अन्य मध्यस्थ देश लगातार दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर बनी परिस्थितियों और दोनों पक्षों की सख्त शर्तों के कारण शांति प्रक्रिया फिलहाल चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित गाजा शांति योजना का भविष्य भी अनिश्चित नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक प्रयास दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने में कितने सफल होते हैं। फिलहाल इजरायल ने साफ कर दिया है कि हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण और गाजा को हथियारविहीन बनाए बिना इजरायली सेना पीछे नहीं हटेगी, जिससे क्षेत्र में स्थायी शांति की राह अभी भी कठिन दिखाई दे रही है।

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