
New Delhi, Delhi
कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के अनुरोध पर दो विशेष न्यायाधीशों को उनके मौजूदा पदों से हटाने की मंजूरी दे दी है। इनमें विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा और धीरज मोर शामिल हैं।
दोनों न्यायाधीश दिल्ली में कोयला घोटाला और विशेष सीबीआई मामलों की सुनवाई से जुड़े थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि दोनों न्यायाधीशों का तबादला किया जाए, ताकि उन्हें अन्य जिम्मेदारियां सौंपी जा सकें।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस अनुरोध पर आदेश पारित किया। आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों न्यायाधीशों के तबादले की मांग की थी।
विशेष अदालत में चल रही थी सुनवाई
कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई के लिए दिल्ली में विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है। इन मामलों में कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित विभिन्न आरोपों और मामलों की सुनवाई लंबे समय से चल रही है।
सुनैना शर्मा को इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष रूप से नियुक्त किया गया था। लेकिन नियुक्ति के करीब छह महीने बाद ही उन्हें इस जिम्मेदारी से हटाने का फैसला सामने आया। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उन्हें अन्य जिम्मेदारियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसी तरह धीरज मोर भी विशेष सीबीआई मामलों की सुनवाई कर रहे थे। हाई कोर्ट ने उनके तबादले का अनुरोध भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया अनुरोध
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट की प्रशासनिक मांग को स्वीकार करते हुए दोनों न्यायाधीशों के तबादले को मंजूरी दे दी। अदालत के आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि दोनों को अन्य जिम्मेदारियां सौंपने के उद्देश्य से तबादले की मांग की गई थी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई है। इन मामलों में विभिन्न आरोपों की जांच और सुनवाई अलग-अलग चरणों में चलती रही है।
अब दोनों न्यायाधीशों के हटने के बाद लंबित कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई के लिए नई व्यवस्था करनी होगी। यह जिम्मेदारी दिल्ली हाई कोर्ट के प्रशासनिक स्तर पर तय की जाएगी।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब दिल्ली हाई कोर्ट को यह तय करना होगा कि कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई आगे किस विशेष न्यायाधीश के समक्ष होगी। इससे लंबित मामलों की सुनवाई की व्यवस्था में बदलाव आएगा।
हालांकि, दो न्यायाधीशों का तबादला एक प्रशासनिक निर्णय है। इसे संबंधित मामलों के आरोपों या उनके गुण-दोष पर अदालत की राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में मुख्य रूप से दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से मांगे गए तबादले और अन्य जिम्मेदारियां सौंपने की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।










