
Written by
Dilip Singh Gour Bureau

पूरे प्रकरण की हो उच्च स्तरीय जांच : दोषियों पर कार्यवाही
– गरीबों को उनके फ्लैट में तत्काल दिलावे प्रवेश
नगर निगम द्वारा जब 208 फ्लैटधारी का आवंटन निरस्त किये बीना , उनके घर में प्रवेश कर सामान बाहर फेंकने और ताला लगाने की कार्रवाई गरीबों के साथ अन्याय , अत्याचार के साथ ही गंभीर अपराधिक प्रकरण है । इसकी उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाए ।
यह मांग पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव , नगरीय पंचायत एवं आवास विभाग को लिखे पत्र में की ।
सकलेचा ने कहां की आयुक्त 5 अगस्त को कहते हैं कि आवंटन निरस्त हो गया है , 6 अगस्त को कहते हैं की 15 दिन के बाद आवंटन निरस्त करेंगे , और 7 अगस्त को कहते हैं कि 31 अगस्त के बाद आवंटन निरस्त करेंगे , अभी आवंटन निरस्त नहीं किया गया है तथा हितग्राही बकाया राशि जमा कर फ्लेट पुनः प्राप्त कर सकते हैं ।
सकलेचा ने पूछा कि यदि 208 हितग्राही का आवंटन निरस्त नहीं नकिया गया तो , किस विधिक अधिकार पर बलपूर्वक बेदखल किया गया तथा उनके फ्लैटों पर ताले लगाए गए ।
महापौर ने अपने बयान में कहा कि 396 ईडब्ल्यूएस हितग्राही में से बैंक से ऋण प्राप्त करने वाले 166 हितग्राही द्वारा किस्ते जमा नहीं किए जाने से उनके खाते एनपीए हो गए , जिस कारण अन्य हितग्राही के ऋण स्वीकृत नहीं हो सके । सकलेचा ने इस पर प्रश्न किया कि यदि 166 ऋण धारको के खाते एनपीए हो गए , तो उसका दुष्परिणाम उन 208 हितग्राही पर क्यों डाला गया । जब नगर निगम ने ऋण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था तो , उसने अन्य बैंक अथवा वित्तीय संस्था से ऋण दिलाने के प्रभावी प्रयास क्यों नहीं किये ??
5 अगस्त का घटनाक्रम न केवल अत्यंत अमानवीय एवं चिंताजनक है, बल्कि इससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं ।
सकलेचा ने कहा कि वर्ष 2020-21 के दौरान शिवनगर, प्रकाशनगर एवं जावरा रोड क्षेत्र में पिछले लगभग 50 से 60 वर्षों से निवासरत दलित समुदाय के गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले झुग्गीवासियों को यह लिखित आश्वासन देकर उनकी झुग्गियों से विस्थापित किया गया कि उन्हें डोसीगांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के बहुमंजिला भवन में फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि प्रत्येक हितग्राही को बैंक में केवल ₹20,000 मार्जिन मनी जमा करनी होगी तथा शेष ₹1,80,000 का आवास ऋण पंजाब नेशनल बैंक से उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी।
इसी विश्वास पर सभी 208 हितग्राहियों ने बैक में निर्धारित मार्जिन मनी जमा की, उन्हें विधिवत आवंटन पत्र प्रदान किए गए, फ्लैटों का कब्जा सौंपा गया तथा वे अपने परिवार सहित वहां निवास करने लगे।
किन्तु वास्तविकता यह रही कि नगर निगम उक्त आश्वासन के अनुरूप हितग्राहियों को ऋण उपलब्ध नहीं करा सका। हितग्राही लगातार पंजाब नेशनल बैंक तथा नगर निगम के चक्कर लगाते रहे, परंतु बैंक ने ऋण देने से असमर्थता व्यक्त करते हुए नगर निगम से संपर्क करने का आग्रह किया। दूसरी ओर नगर निगम द्वारा भी ऋण उपलब्ध कराने हेतु कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया गया।
इसके बावजूद 5 अगस्त को भारी पुलिस बल, कार्यपालिक दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार की उपस्थिति में नगर निगम द्वारा इन परिवारों के फ्लैटों में प्रवेश कर उनका घरेलू सामान बाहर फेंक दिया गया, महिलाओं एवं बच्चों को बलपूर्वक बाहर निकाला गया तथा फ्लैटों पर नगर निगम के ताले लगाकर उन्हें सीलबंद कर दिया गया।
अत्यंत आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि 29 जुलाई के अंतिम सूचना पत्र में इन विधिवत आवंटित हितग्राहियों को “बिना अनुमति अवैध कब्जाधारी” बताया गया, जबकि उन्हीं फ्लैटों का आवंटन नगर निगम द्वारा स्वयं किया गया था और कब्जा भी उसी के द्वारा प्रदान किया गया था।
प्रथम दृष्टया यह संपूर्ण घटनाक्रम प्रशासनिक निष्पक्षता, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा विधिक प्रक्रिया के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। बिना विधिसम्मत निरस्तीकरण के हितग्राहियों को बेदखल कर उनके घरों पर ताला लगाना तथा उनके सामान को बाहर फेंकना अत्यंत गंभीर प्रशासनिक एवं विधिक परीक्षण का विषय है।
सकलेचा ने पत्र में मुख्य सचिव से मांग की कि , इस संपूर्ण प्रकरण की किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र अधिकारी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए । दोषी अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए । तथा सभी 208 हितग्राहियों को तत्काल उनके फ्लैटों में पुनः प्रवेश दिलाते हुए आवंटन पत्र में किए गए आश्वासन के अनुरूप बैंक ऋण उपलब्ध कराने की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ।
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